Sunday, 28 September 2025

मतलब

बिना किसी फायदा के, कोई पास नहीं आता,  
रिश्तों की गलियों में भी, कदम अक्सर पीछे हट जाते हैं।  
हमारी हँसी, हमारी खुशियाँ,  
कभी-कभी सिर्फ दूसरों के फायदे के लिए नापी जाती हैं।  

और हम भी… हाँ, हम भी  
कभी-कभी खुद को मतलब का बना लेते हैं,  
कभी-कभी अपनी सुरक्षा और स्वार्थ के लिए  
दूरी और चुप्पी अपना लेते हैं।  

पर यही तो जिंदगी है…  
रिश्ते बिकते हैं, रिश्ते टिकते हैं,  
उनकी गहराई, उनकी सच्चाई पर।  
जो बिना उम्मीद और बिना हिसाब के साथ रहते हैं,  
वो ही असली रिश्तों की पहचान हैं।  

वो अपनापन, वो मोहब्बत,  
जो हर दर्द को सहला सके,  
जो बिना कहे समझ जाए,  
वो ही हमारे जीवन का असली रत्न है।  

बाकी सब, सिर्फ दिखावा और मतलब का खेल है,  
जो चाहे दूर हो जाए, चाहे पास हो जाए,  
पर जो सच्चा है, वही यादों में हमेशा जिंदा रहता है।  

इसलिए सीख लो,  
रिश्तों की भीड़ में खुद को मत खो देना,  
और सच्चाई की तलाश में,  
दिल से जीना मत भूलना।

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